- आज भी मातृभाषा दिवस है पर...
- कहीं काँग्रेस तो मोदी को प्रोजेक्ट नहीं कर रही है
- कैसा होगा नवाज़ शरीफ़ का पाकिस्तान?
- परिवर्तन या परिवारवाद!
- पिंजरे में बंद ‘तोते’ पर सवाल
- वे, जो चुनाव लड़ने से पहले ही हारे हुए हैं !
- बांग्लादेश में हिंसा से मुश्किल में छोटे कारोबारी
- Bajwa is back with a bang
- आखिर पठान क्यों आउट हो गये?
- धर्म संकट में है, आइए किसी अवतार का इंतजार करें!
- अब विवादों में घिरे स्वयंभू संत रामपाल
- गीतिका मर गई, मिरासी मगर जिंदा हैं !
- जज ने कहा, मुझे मेरे बेटे से बचाओ !
- नवाज को उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती!
- कोल इंडिया के एक लाख कर्मचारियों के परिवारों के यहां चूल्हा कैसे जलेगा?
- दामोदर घाटी में भूमिपुत्र जमीन, रोजी और रोटी से बेदखल
- सफेदपोशों की शह पर चलती है रेल, अवाम अवाक रहती है!
- मोदी व कांग्रेस के बीच और तेज होगी सियासी जंग
- अब चैन से रहने दो, शुक्ला जी !
- हिंसा हुई तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
- सड़क पर पीटे गए अभिनेत्री ऋतुपर्णा के पति, पुलिस देखती रही
- कर्नाटक की जीत से परेशान कांग्रेस
- सुदीप्त से पूछताछ करेगी सीबीआई
- कांग्रेस हित में नहीं, ये नीति
- एक थी हेलन और एक था फ्रेडी
- चना बेचने वाले भी रखते हैं बड़ों-बड़ों की खबरें
- मुकेश भारद्वाज को पितृशोक
- सुदीप्त के साथ रिश्तों से इंकार क्यों कर रही है देवयानी?
- शारदा समूह के टीवी चैनल और अखबारों पर सत्ता दल का कब्जा?
- कर्नाटक : राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में
- मां माटी मानुष की सरकार आम जनता से सत्ता छीनने लगी
- बंगाल में विदेशी मुद्रा का फैला जंजाल
- मासूम गिरोहों की दिल्ली…
- 390 युवाओं ने कहा, नौकरी नहीं तो मरने तो दो
- सरबजीत को हमने मारा
- मंत्री नहीं, सांसद के रूप में भी 'घपला' किया बंसल ने
- अगले जनम मुझे पत्रकार ही कीजो
- क्योंकि कुलदीप को राजनीति नहीं आती (दो)
- आखिर भारत सरकार किसके प्रति जवाबदेह है?
- कोयला दहक रहा है, छुओगे तो राख में तब्दील हो जाओगे
- कहानी कुन्नू, एक बाहुबली और चुनावी इतिहास की !
- क्योंकि कुलदीप को राजनीति नहीं आती (एक)
- 'ये कत्लोगारत बांग्लादेश का अंदरुनी मामला नहीं है'
- सबकी पोल खोल देंगे सुदीप्त
- रिहाईशी क्षेत्रों को ज़हरीला बनाते उद्योग
- जहां पानी नहीं नहाने को, वे चले कोका कोला जमाने को
- गणेश शंकर विधार्थी को आदर्श माना पत्रकारों ने
- Goats get going at great writer's place !
- बदस्तूर जारी है ‘ड्रैगन’ की फुंफकार
- US: No Entry for Mr. Modi
- दीदी का फेसबुक पर सीबीआई पे जनमत संग्रह
- कोयला घोटाला सिर्फ ब्लाकों में नहीं, परत दर परत है
- आस्था पर भारी कारोबार, बता रहे आस्था के केंद्र चार!
- Adivasis need speedy and impartial justice
- बस भी करो विश्लेशको
- Peaceniks pray for Sanaullah, hold candle-lit vigil
- पर, एजेंट तो जीते जी मर गए !
- सरकार को ‘महंगा’ पड़ रहा है मंत्रियों का बचाव
- क्या बेनजीर भी शामिल थीं चिटफंडे के धंधे में ?
- उत्तराखण्ड में न्यूनतम मज़दूरी का मुखर विरोध
- खीर खाई सब ने मगर गिरेबां में झाँकने को तैयार नहीं!
- धोनी को बनाया भगवान, धोनी ने भगवान के हाथ में पकड़ाया जूता
- उम्मीद अभी ज़िन्दा है सरहद के दोनों तरफ़
- नलवन को नोटिस क्या धंधे बंद करने का संकेत है?
- अब हिंदुओं की बाढ़ बांग्लादेश से आएगी
- क्या ममता तख्ता पलट देंगी?
- मुकुल भी शक के दायरे में, अब दीदी क्या करेंगी?
- डाकघरों में भी तो पूंजी सुरक्षित नहीं है!
- Rajiv acquitted Sajjan long ago, writes Ribeiro
- Domestic violence rises in CM's town
- Will the biases about terrorists remain permanent?
- 'हिमालय बचाओ' पदयात्रा शुरू'
- फिर बेनक़ाब हुआ पाक का ‘नापाक’ चेहरा
- हरियाणा में दलितों पे ज़ुल्म बढ़े हैं
- क्या ध्वस्त होगा दक्षिण में भाजपा का किला ?
- Didi threatens to make posters of Opposition
- अपर्णा सेन भी याद है किसी को !
- गृहयुद्ध में ही उलझ गईं ममता
- बंगला फिल्मों को भी चपत लगाई चिटफंड ने
- अखिलेश को मुसलमानों का हमदर्द बताने वाले उलेमा सपा के एजेंट- रिहाई मंच
- आपदा के कगार पर है झरिया और रानीगंज
- किस के जने हो तुम चंदन श्रीवास्तव ?
- लचर विदेश नीति ने ली सरबजीत की जान
- चिटफंड के तार रायसीना हिल्स तक?
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- लेकिन निवेशकों को सनसनी के अलावा मिलेगा क्या?
- कुप्रबंधन का बोझ ढोती जनता
- फैजाबाद दंगे में मीडिया की भूमिका
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- फासीवाद की दस्तक है मोदी की उम्मीदवारी
- कोका कोला उजाड़ेगा अब घाटी का एक गांव
- अगला प्रधानमंत्री कौन?
- लानत है !
- उग्रवादियों से जुड़े मिले चिटफंड के तार
- कट्टरपंथियों के हावी होने का सबूत है सरबजीत पे हुआ हमला
- ये कौन लड़ रहे हैं बलात्कार की लड़ाई
- लूट का विरोध करेंगे तो माओवादी होंगे आप
- चिट फंड की जांच, न आएगी किसी पे आंच
- कोशिश आत्महत्याएं नहीं, सत्ता बचाने की है !
- फिलहाल पंचायत और पालिका चुनाव के आसार नहीं
- बनारस में लेनिन रघुवंशी पर हमला
- गिरफ्तारी ही 'झूठी' तो आरडीएक्स कहां से आया? : रिहाई मंच
- Mere paas media hai
- केंद्रीय एजंसियां अब तक कहां थीं?
- चिटफंड : खुल्ला खेल फर्रूखाबादी सेक्स, ग्लैमर और राजनीति का
- बेगुनाहों की रिहाई के सवाल को शिगूफों के सहारे भटकाने की कोशिश- रिहाई मंच
- शर्मसार करने वाली घटनाओं का ज़िम्मेदार कौन?
- सीमा विवाद निबटाए बिना चीन से व्यापार की कीमत चुका रहा है भारत
- कहां सोए हैं बंगाल के बुद्धिजीवी?
- राइफल वाला पत्रकार
- तानाशाह मुशर्रफ को करारा सबक
- कानून मंत्री के मामले में सरकार को सबक सिखाएगी भाजपा
- यूनियन ने डोभाल स्मृति ट्रस्ट को नोटिस भेजा
- चिटफंड के इस खेल में चट हुई पियाली याद है किसी को?
- ये चिटफंड का धंधा तो बड़ा सेक्सी निकला !
- भाड़ में गई यूनिसेफ और ....बच्चे!
- आंबेडकर और उनका "आर्थिक जनतंत्र" मिशन
- जाति उन्मूलन : दिल्ली बहुत दूर है
- दीदी का गुस्सा और एक बागी पुलिस अफसर की चेतावनी
- बलात्कार उनकी चिंता नहीं, शोशा है !
- आरक्षण जरूरी है या बलात्कार से निजात
- उलटी पड़ गईं सब तदबीरें......
- बंगाल के लिए भारी पड़ा सुदीप्त नाम
- मुक्त बाजार, राजनय, हिंदुत्व और धर्मनिरपेक्षता
- पीएफ और पेंशन का बारह बजना तय
- भगवे चोले’ का आतंक
- जो बचा है उसमें कितनी है ‘सरकार’!
- नरसंहार रुकेंगे या ओबामा खुद सुदामा हो जाएंगे?
- गंगा का दुलारा ‘योद्धा’ प्रो. वीरभद्र मिश्र
- क्या करूणानिधि ब्लैकमेलर हैं?
- आइसना की कार्यकारिणी घोषित
- 'आयोग की रिपोर्ट में तब्दीली करने की फिराक में सरकार'
- अंबेडकर हर मायने में प्रासंगिक हैं
- इरोम के बहाने ...
- नेता जी के सख्त तेवरों के चलते सरकार ने लिया ‘यू-टर्न’
- बाज़ार में बिकने को तैयार, पत्रकार
- वड्डा वकील साहब
- मिल तो गए मुद्दे, अब हमारी जेब न काटो !
- सत्यानाशी सोच
- समाज सुधारने की सोच से बदलेगा समाज
- कलर्स चैनल के खिलाफ पुलिस केस
- आर डी निमेष जांच आयोग की रिपोर्ट (दो)
- आर डी निमेष जांच आयोग की रिपोर्ट (एक)
- सांस्कृतिक संहार के विरुद्ध ‘भाषा कर रही है दावा’
- अंबेडकर की एक बार फिर हत्या की तैयारी
- ... तो पत्रकारिता प्रोफेशन है, मिशन नहीं ?
- दुनिया का सबसे असुरक्षित देश, पाकिस्तान
- औद्योगिक गलियारे का विरोध होगा
- सड़कों पर उतरेंगे अब उत्तराखंड के पत्रकार
- दंगों की हो सीबीआई जांच- रिहाई मंच
- ...जब स्विस बैंक भारत में ही हैं
- आदिवासी को गुस्सा क्यों आता है? (3)
- आदिवासी को गुस्सा क्यों आता है? (2)
- आदिवासी को गुस्सा क्यों आता है? (1)
- Mr. Modi, you are not welcome: Wharton Debate
- लाश की इंतज़ार में एक मज़ार
- साकेत बहुगुणा पर 111 करोड रूपये की हेराफेरी का आरोप?
- ग़लत शिनाख्त ने कटवा दिए जेल में 21 साल
- शहादत को सिनेमा का सलाम
- अंबेडकर के सारे प्रयोग एक ‘‘महान विफलता’’ में समाप्त हुए – तेलतुंबड़े
- कांशीराम ''चमचा युग'' के आईने से
- ये किन के अस्तर फटे स्तर के नाम पे?
- आपराधिक कानून संशोधन विधेयक पर ‘पंगा’ बरकरार
- गुजरात नरसंहार 'कलंक' नहीं, कारपोरेट ब्रांडिंग है!
- संघर्ष यात्रा ने खोली ‘चमकीले गुजरात‘ की असलियत
- पूंजीवाद के अंतर्विरोध और मौजूदा संकट
- NAPM shows solidarity, demands justice
- 'निर्दोषों को छोड़ने का वादा पूरा करो'
- बड़े चालाक हो तुम...
- बदलाव की राह पे भारतीय रेल
- भारतीय हौसले की अग्नि परीक्षा
- Attacks on minorities in Pak, Bangla Desh condemned
- 'Not Hindus, Sikhs are minority'
- '...तो देश चलाने वालों की भी योग्यता तय हो'
- भोपाल आई.एफ.डब्ल्यू. जे. निर्वाचन 14 अप्रैल को

Comments
AAP NE PAHARO KE TEJI SE BADAL RAHE PERYAWRAN KE SHAMBANDH ME JO CHINTA JATAI HAI . WAKAI KAFI GAMBHIR HAI. PAHARO ME YADI LAGATAR VANO KI AAVEDH KATAI HOTI RAHI CHAHE WO INDHAN, KALKARKHANO, DAM, ROAD, YA KISI AANYA KARNO KE LIYE HO BAHUT VINASKARI SHIDH HOGA, ISKE HONE WALE PERINAMO KI CHETAWANI PERKRITI NE UTTERKASHI ME AABHI HAL ME FATE VINASKARI BADEL JINKE DWARA HUI HANI SE AAGAH KARDI HAI. TEJI SE KATTE VIRKSHO SE MRIDA UPERDAN KI GHATNAYE BHUKAMP KA AAGAZ KER RAHI HAI . ISKELIYE ANIYAMIT BHU VIDOHAN, KHUDAI BHI JAWABDAR HAI. PAHARO ME TEJI SE BADALTE JALWAU PERIWARTEN KO ROKNE AAB HAMSAB KO SACHET HO KER PAHARO KE BEHATRI OUR UTTHAN HETU KADAM UTTHANA HOGO NAHI TO WO DIN KAFI NAJDIC HAI JAB HUM KAHENE KO MAJBUR HONGE '' WO EK KHUBSURAT PAHAR THA , JO WAKT KIRAWANIYO KE SUPURD HO KHAK HO GAYA'' Quote
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